घुटन है बेहद ये खिड़की खोल तोदो ,
फेंकते हो जाल क्यों ?कुछ बोल तो दो /
संधियों से छन रही है रोशनी ,
पाल जैसी तन रही है रौशनी ,
पतंगें हैं उम्र की ,तानों नहीं ,कुछ झोल तो दो //
दूसरों के लिए बस बातें बची ,रह जाएँ तो है ,
टूटते विश्वाश सब जीने पड़े ,सह जाएँ तो है ,
आंसुओं के सब गणित हैं पास मेरे ,बोल तो दो //
रोकने से भी नहीं रुकता दुखी मन ,
झूट कैसे बोल सकता है भला दर्पण?
आज कल सबकुछ बिकाऊ है ,भला कुछ मोल तो दो //
दिल क़ी गहराई से लिखी गयी एक रचना , बधाई
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रियवर
प्रत्युत्तर देंहटाएंजीवन के अनेक पहलुओ में से कुछ पर आपके हस्ताक्षर करती ये कविता भिन्नी भीनी खुशबू छोड़ती बेहद सुन्दर है /
thanks
क्या बात है सर रोज़ कुछ और तीखी फिर कुछ और...क्या बात है ....वाह वाह
प्रत्युत्तर देंहटाएंचन्दर
नये ब्लॉग का सही पता यह है सर, प्लीज़..
प्रत्युत्तर देंहटाएं.angrezikiclass.blogspot.com
आदरणीय, एक एक लाइन अपने आप मे बेहद उम्दा. वाह!
प्रत्युत्तर देंहटाएं-
सपरिवार आपको नव वर्ष की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.
नव वर्ष २०११ और एक प्रार्थना