यह ब्लॉग खोजें

लोड हो रहा है. . .

15 नवम्बर 2010

घुटन है बेहद ये खिड़की खोल तोदो ,
 फेंकते हो जाल क्यों ?कुछ बोल तो दो /

संधियों से छन रही है रोशनी ,
पाल जैसी तन रही है रौशनी ,
पतंगें हैं उम्र की ,तानों नहीं ,कुछ झोल तो दो //
दूसरों के लिए बस  बातें बची ,रह जाएँ तो है ,
टूटते विश्वाश सब जीने पड़े ,सह जाएँ तो है ,
आंसुओं के सब गणित हैं पास मेरे ,बोल तो दो //
रोकने से भी नहीं रुकता दुखी मन ,
झूट कैसे बोल सकता है भला दर्पण?
आज कल सबकुछ बिकाऊ है ,भला कुछ मोल तो दो //

5 टिप्पणियाँ:

  1. दिल क़ी गहराई से लिखी गयी एक रचना , बधाई

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. प्रियवर
    जीवन के अनेक पहलुओ में से कुछ पर आपके हस्ताक्षर करती ये कविता भिन्नी भीनी खुशबू छोड़ती बेहद सुन्दर है /
    thanks

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. क्या बात है सर रोज़ कुछ और तीखी फिर कुछ और...क्या बात है ....वाह वाह
    चन्दर

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. नये ब्लॉग का सही पता यह है सर, प्लीज़..
    .angrezikiclass.blogspot.com

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  5. आदरणीय, एक एक लाइन अपने आप मे बेहद उम्दा. वाह!
    -
    सपरिवार आपको नव वर्ष की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.
    नव वर्ष २०११ और एक प्रार्थना

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं