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गज़ल

by 11:36 pm
ग़ज़ल यूं ही कहना है अगर आपको ,कहते रहिए , भीड़ में एक किसी चेहरे सा रहते रहिए , आज सच्चाई का दीया अगर जलाया है , दर्द सूली का किसी ईसा स...Read More

ग़ज़ल

by 10:49 pm
शाम उतरती मौसम नम / सपनों की आँखों में ग़म // अक्सर अपने ही छलते / वरना क्या गैरों में दम // इन्टरनेट परवान चड़ा / प्यार बहुत पर परिचय कम // ...Read More

ग़ज़ल

by 9:25 pm
इस तरह से जिया ,मै मरा / ज़िन्दगी में नही है त्वरा // तप रहा और ज्यादा गगन / निर्जला हो रही है धरा // रौशनी हारने लग पड़ी / लग रहा है अँधेरा...Read More
© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.