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खोजता हूं ........

खोजता हूं मैं एक खिड़की सी किसी दीवार में ,
दे सके जो एक झोंका हवा का सा प्यार में //
जो पुरातन बंधनों को सह न पाए एक पल ,
देख कर जिसको मिले हर प्यार को इक नया बल,
जो किसी उन्माद सा इस ज़िन्दगी को जी सके ,
जो युगों का मान-मर्दन कर लिखे बस एक पल ,
एक दीया काश ऐसा जल सके परिवार में //
हर गली में गीत गाता ,घूमता फिरता रहे ,
सूर्य सा जलता ख़ुशी से ,हवा में तिरता रहे ,
जो समय के दंश को भी ,ले सके उपहार सा ,
बांटता खुशियाँ रहे गो दर्द में घिरता रहे ,
एक भी मिल जाय तो रस्ता मिले मंझधार में //
कांपती सर्दी बने या जेठ की  बेहद तपन,
पावं धरती पर मगर हों आँख मे कोई सपन ,
कर सके महसूस औरों को भी अपनी ही तरह ,
ए  मेरे मालिक किसी को दे भी दे ऐसी लगन ,
जो करे मन से करे ,मन दे सके आभार में //

3 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छे रिदम मे बहुत सुन्दर तरीके से अपनी भावनाओं को प्रस्तुत किया है आपने.
    -
    सागर by AMIT K SAGAR

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  2. बहुत ही खूब्सूरत सर...आप तो खुद ही गज़ल हुये जा रहे है....लाजवाब ऐसी प्रार्थना...

    उत्तर देंहटाएं
  3. अमित भाई,चंदर जी ,आप दोनों बंधुओं का हार्दिक आभार /आगे भी स्नेह बनाये रखिये यूं ही /सस्नेह ,
    भूपेन्द्र

    उत्तर देंहटाएं

© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.