शाम उतरती मौसम नम / सपनों की आँखों में ग़म // अक्सर अपने ही छलते / वरना क्या गैरों में दम // इन्टरनेट परवान चड़ा / प्यार बहुत पर परिचय कम // ...Read More
ग़ज़ल
Reviewed by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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10:49 pm
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मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ,स्नेह और आत्मीयता के चलते सभी को अपने साथ समेट लेने की आकांक्षा ,पूरी हो ,ना हो पर है तो ,जीवन में सब कुछ चाह कर कहाँ मिल पाता है ?बहुत मिला हार्दिक धन्यवाद