टूटता है मन,मनोबल टूटता है/
कोई अपना जब अचानक रूठता है //
दर्द का सागर सुनामी पालता है /
अभिव्यक्ति का ज्वालामुखी जब फूटता है //
दूर तक देखें कहाँ है ताब किसकी/
आजकल रहबर ही घर को लूटता है//
\रेल के पहियों सरीखी ज़िंदगी है /
प्लेट फोर्म पर सिफ़र ही छूटता है//
यह अज़ब अनुभूति है अपनी कथा की/
खुद ही जो खोया उसी को ढूँढता है//
कोई अपना जब अचानक रूठता है //
दर्द का सागर सुनामी पालता है /
अभिव्यक्ति का ज्वालामुखी जब फूटता है //
दूर तक देखें कहाँ है ताब किसकी/
आजकल रहबर ही घर को लूटता है//
\रेल के पहियों सरीखी ज़िंदगी है /
प्लेट फोर्म पर सिफ़र ही छूटता है//
यह अज़ब अनुभूति है अपनी कथा की/
खुद ही जो खोया उसी को ढूँढता है//