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29 जनवरी 2013

ग़ज़ल

टूटता है मन,मनोबल टूटता है/
कोई अपना जब अचानक रूठता है //
दर्द का सागर सुनामी पालता है /
अभिव्यक्ति का ज्वालामुखी जब फूटता है //
दूर तक देखें कहाँ है ताब किसकी/
आजकल रहबर ही घर को लूटता है//
\रेल के पहियों सरीखी ज़िंदगी है /
प्लेट फोर्म पर सिफ़र ही छूटता है//
यह अज़ब अनुभूति है अपनी कथा की/
खुद ही जो खोया उसी को ढूँढता है//

बात की बात में ............................................

बात की बात में कहानी लिख /
उम्र को दर्द की जवानी लिख //
मां  ने पाला  जिसे तपस्या से /
उसी बचपन को अब जवानी लिख//
आग से कैसे बचे अब बस्ती?
ऐसी कुछधूल ,रेत  ,पानी लिख//
लोग खंजर लिए हुए हैं मन में/
उन्ही के रहमोकरम लिख ,तू राजधानी लिख //
जो पैर पेट में दे सोते हैं आसमां के तले /
कि उनके दर्द की तल्खी तू आनी जानी लिख //
अगर तू चाहता है कि ये आबो हवा साफ़ रहें /
तू मेरे,सूर,और कबीर जैसी बानी लिख//

ग़ज़ल 

टूटे मन से और बहुत भी टूटा हूँ/
औरों को क्या कहूं जो खुद ही झूठा हूँ//
जग में कितने अपनों को दी पीडाएं /
औरों से ठोकर खाई तो रूठा हूँ//
संगम की रेती पर पर चल जीवन काटा /
पर अब लगता है बगलोलों  का फूफा हूँ//
इतना हम से कभी पूछ तो लेते तुम/
इतना लूटी दुनिया फिर क्यों भूखा हूँ ?
सबके आगे आगे दौड़ा जीवन भर  /
पर अब लगता है सबसे पीछे छूटा हूँ //

4 अक्तूबर 2012

ग़ज़ल

हवाओं  के  उलटे ही हम बोलते हैं /
उडने के पहले ही पर तौलते हैं//
रही जंगलों में है रहने की आदत/
मगर  मन में इसको ही घर बोलते हैं//
अंधेरों में काफी है नन्हा   दिया भी /
वे अंधों को रोशन नज़र बोलते हैं//
दरवाज़े  दिल के हैं  बन्द इसलिए बस /
मेरे  हमसफ़र इस  कदर बोलते हैं//

18 जुलाई 2012

गीत

तेरी  इक निगाह के  कमाल से,

मेरा मन ये सावन हो गया ,

तेरी मीठी-मीठी छुवन भली ,

 कि ये दर्द पावन  हो गया //

कहाँ रोशनी की मज़ाल थी,

जो वो छू सके तम के शिखर ,

तेरी जुस्तजू का  असर हुआ ,

कि जो धूप सा मन हो गया //
चले हम हज़ार कदम यहाँ ,
तेरी इक हंसी लिये साथ में ,
वही याद भर को  नमी भी है,


,वही मन भी दर्पण हो गया //
यहाँ ज़िदगी थकने लगी ,
हुआ प्यार सूखे ताल सा ,
यहाँ बाग थे ,घर ,गाँव थे ,
जिन्हे खो के मन अनमन हुआ //
मेरे पास वो रूमाल है ,
जिसमे तुम्हारी याद है ,
तेरे आंसुओं की नमी भी है ,
यही प्राप्ति का क्षण हो गया //