गीत................ हम समय का इक छोटा सा हिस्सा ,साथ तुम्हारे बीत गये हैं ,रेतीले रेगिस्तानों की , बावदियों सा रीत गये हैं ,सच पूछो तो तुमको...Read More
Reviewed by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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12:51 am
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मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ,स्नेह और आत्मीयता के चलते सभी को अपने साथ समेट लेने की आकांक्षा ,पूरी हो ,ना हो पर है तो ,जीवन में सब कुछ चाह कर कहाँ मिल पाता है ?बहुत मिला हार्दिक धन्यवाद