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गीत................
हम समय का इक छोटा सा हिस्सा ,साथ तुम्हारे बीत गये हैं ,रेतीले रेगिस्तानों की , बावदियों सा रीत गये हैं ,सच पूछो तो तुमको हमने ,जीवन की सी परिभाषा दी,कब्रिस्तानों के पेड़ों सी,जी लेने की अभिलाषा दी, हम ने तुमको छुआ कि मेरा ,मन कंचन कंचन हो आया ,पैठ गये हो तुम यूँ हममे जैसे हो दर्पण मे छाया ,रात निखरती जाती जैसे ,तेरा रूप निखरता जाता ,तेरे रूप गंध की चर्चा अब भी कवि लिखता गा पाता//

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया गीत!्बधाई स्वीकारें।

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  2. nice post sir...
    aapke comment ne mujhe prerit kiya ki apne strength ko pahchaanu aur fir ek baar upsc ko chunouti doon .....thanks...

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© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.