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आज कल

आज कल मन उदास रहता है ,
दर्द के आस पास रहता है ,
मन है घायल हिरन सा बस्ती में ,
प्यार मरती नदी सा बहता है ,
धूप है तेज़ ,कम है छायाएं ,
अपना ग़म कौन किस से कहता है ?
हम से पूछो न हाले दिल यारों ,
आजकल कौन इतना सहता है?

2 टिप्‍पणियां:

  1. धूप है तेज़ ,कम है छायाएं ,
    अपना ग़म कौन किस से कहता है ?
    हम से पूछो न हाले दिल यारों ,
    आजकल कौन इतना सहता है?
    शेर मार्मिक हैं!पूरी ग़ज़ल कथ्य और शिल्प दौनों की दृष्टि से बहुत सुंदर है !ब्लॉग हिन्दी में बनायें तो और अच्छा लगेगा !ब्लॉग से word verification हटा दें,टिप्पणीकरने में सुविधा रहेगी !

    उत्तर देंहटाएं
  2. इतने अच्छे फोर्मेट के लिए बधाई !बस अब अपने ब्लॉग का नाम सुंदर सा हिन्दी में और लिख डालिए!
    नयी पोस्ट के इंतजार में !

    उत्तर देंहटाएं

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