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मेरा मुन्ना

मेरा नन्हा ,मेरा मुन्ना ,
मेरा प्यारा, मेरा राजा ,
कहीं पर सो रहा होगा ,
कहीं पर जग रहा होगा ,
समय के तेज़ झोंकों में भी ,
सपना हो रहा होगा ,
मुझे न देख कर मां से कभी ,
कुछ पूछता होगा ,
बुला दो मेरे पापू को ,
यह कह कर रूठता होगा ,
कोई जब डांटता होगा ,
या कभी कोई घूरता होगा ,
तो बरबस आँखों से आंसू ,
छलकते होंगे नन्हे के ,
मई उनके पास जाऊँगा ,
ये कहता होगा मेरा बेटा ,
मगर ये दूरियां इतनी ,
और ये पैर नन्हे से ,
कैसे नापें सागर को ?
मेरा ये प्यारा बेटा भी?

7 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. अरे ! बहुत अच्छा लिखा है......
    पिता और बेटे की भावनाओं और उनके संबंधो को उजागर करती बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है आपकी.....


    अक्षय-मन

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  3. mere blog pe aane ke liye shukriya.
    aapka blog dekha achcha laga, ab mai regular aapka blog visit karunga. naye saal ki badhai.

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  4. बढ़िया लिखा है बाप बेटे के बीच की ज़मीनी दूरी नही बल्की दिली दूरी को खूब लिखा है...भागती ज़िंदग़ी हांफता परिवार का अस्तित्व और झुलसते समाज की अच्छी व्यंजना है...पेट के लिए अपने बेटे से दूर बच्चा नन्हे क़दमों से मज़बूर महज़ कल्पना के घोड़े दौड़ा रहे हैं। बधाई हो

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  5. माँ की ममता का सुन्दर चित्रण।

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  6. बहुत खूब ...
    अपने बेटे के छुटपन में मैं उसके साथ बहुत कम रह पाया।
    इसकी संवेदना से खुद को जुड़ा पाता हूं...

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  7. दिल को छू लेने वाली अभिव्यक्ति!
    बहुत ही सुंदर.

    उत्तर देंहटाएं

© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.