ग़ज़ल by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह11:07 pm टूटता है मन,मनोबल टूटता है/ कोई अपना जब अचानक रूठता है // दर्द का सागर सुनामी पालता है / अभिव्यक्ति का ज्वालामुखी जब फूटता है // दूर तक...Read More
by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह10:46 pm बात की बात में ............................................ बात की बात में कहानी लिख / उम्र को दर्द की जवानी लिख // मां ने पाला जिसे ...Read More
by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह10:31 pm ग़ज़ल टूटे मन से और बहुत भी टूटा हूँ/ औरों को क्या कहूं जो खुद ही झूठा हूँ// जग में कितने अपनों को दी पीडाएं / औरों से ठोकर खाई तो रू...Read More
ग़ज़ल by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह10:45 pm हवाओं के उलटे ही हम बोलते हैं / उडने के पहले ही पर तौलते हैं// रही जंगलों में है रहने की आदत/ मगर मन में इसको ही घर बोलते हैं// अंधे...Read More
गीत by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह12:40 pm तेरी इक निगाह के कमाल से, मेरा मन ये सावन हो गया , तेरी मीठी-मीठी छुवन भली , कि ये दर्द पावन हो गया // कहाँ रोशनी की मज़ा...Read More