कविता by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह9:24 pmकविता ? कविता को पजामे की तरह पहनना उतारना, झाड़ू की तरह बुहारना , क्या ठीक है? क्या यही कविता की सही लीक है ? कविता में क्या नया ? ...Read More
खोजता हूं ........ by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह11:03 pmखोजता हूं मैं एक खिड़की सी किसी दीवार में , दे सके जो एक झोंका हवा का सा प्यार में // जो पुरातन बंधनों को सह न पाए एक पल , देख कर जिसको म...Read More
by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह5:56 amघुटन है बेहद ये खिड़की खोल तोदो , फेंकते हो जाल क्यों ?कुछ बोल तो दो / संधियों से छन रही है रोशनी , पाल जैसी तन रही है रौशनी , पतंगें ...Read More
कविता by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह3:03 pmकुछ बोलो तो ....... कुछ बोलो तो कि क्या भला करते? जो भी करसकते थे वो किया हमने , एक अंधेरे से बारजे पर चढ़ कर , प्यार का दीप धर दिया हम...Read More
तुम्हारे लिए by डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह11:34 pmएकसमय था जब मै तुमको फूलों की रानी कहता था , एक समय था जब मैं सागर हो कर नदिया सा बहता था , एक समय था जब यह जीवन खुशियों का इक गुलदस्ता था...Read More