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18 फरवरी 2011

बाल गीत 2

नन्हा मुन्ना बच्चा हूँ ,
सीधा सादा सच्चा हूँ ,
हरदम मैं मुस्काता हूँ,
उल्टा सीधा गाता हूँ ,
रोता भी हूँ कभी कभी ,
हो जाता जब गुच्छा हूँ //
पापा बनते हैं घोडा ,
मम्मी भी थोडा थोडा ,
करता खूब सवारी हूँ ,
घुड़सवार मैं अच्छा हूँ //
जब तब करता शैतानी ,
धमाचौकड़ी मनमानी ,
खूब धमाल मचाता हूँ,
पढ़ने मे कुछ कच्चा हूँ //
प्यारी है मेरी मम्मी ,
हरदम लेती है चुम्मी ,
पापा बडे निराले हैं ,
उनका ही तो बच्चा हूँ//

9 टिप्पणियाँ:

  1. बहुत सुन्दर बाल कविता बच्चों की मन की बात अच्छी लगी , बधाई

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  2. अच्छा लिखते हो , बहुत रचनाएँ पढने के बाद लगा कि आपका लेखन मानवीय मूल्यों पर आधारित है ..आप इसे बनाये रखें ...मेरे ब्लॉग पर आकर उत्साहवर्धन के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया ...आशा है आपका मार्गदर्शन यूँ ही मिलता रहेगा ..आपका आभार

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर गीत रचा है आपने..... बच्चो का मनभावन .....
    -----------
    चैतन्य के ब्लॉग पर आने के लिए आभार .....

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. बहुत प्याली - प्याली सी है ये लचना |
    बहुत खुबसूरत रचना एसा लगा जेसे छोटा बच्चा खूब गा कर सुना रहा हो |

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं