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राम लला

नेह भरी अँखियाँ जिनकी ,अधरों पै मंद सुहास पला ,
चित चोर गई बांकी चितवन ,जिनमे बसती चितचोर कला ,
गति मति की थाम लई जिन ने ,जिनकी गति मे चमकै चपला ,
राम को नाम सदा कहिये ,पुनि पुनि कहिये श्री राम लला ,// 


प्रन की प्रतिभा जग जीत गयी ,जगती जीती अति रण कर के ,
सब संकट काटी के पाटी धरा ,फिर जीता समय क्षण क्षण करके ,
न्योछावर प्रान उदारन पै ,रचि राज दियो कण कण करके ,
यह नेह को नेम रह्यो है सदा ,मिली रोज रहे फिर भी विकला ,

राम को नाम सदा कहिये ,पुनि पुनि कहिये श्री राम लला ,// 



3 टिप्‍पणियां:

  1. राम को नाम सदा कहिये ,पुनि पुनि कहिये श्री राम लला

    -जय श्री राम!!

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  2. ांअपको जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनायें

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  3. प्रिय भूपेंद्र जी ,
    आपकी चंद लाईनों ने मुझे बड़ी उलझन में डाल दिया है / प्रारम्भिक लाईने [राम को नाम सदा कहिये ,पुनि पुनि कहिये श्री राम लला ] तक तो बात समझ में आई परन्तु
    प्रन की प्रतिभा जग जीत गयी ,जगती जीती अति रण कर के ,
    सब संकट काटी के पाटी धरा ,फिर जीता समय क्षण क्षण करके ,
    न्योछावर प्रान उदारन पै ,रचि राज दियो कण कण करके ,
    यह नेह को नेम रह्यो है सदा ,मिली रोज रहे फिर भी विकला ,
    ये लाईने समझ नहीं पा रहा हूँ लिहाजा कवी की मनः स्थिति क्या है ये कृपाकर स्पस्ट करे / फिर मै अपनी बात रखूंगा / उम्मीद है जैसा की आप जानते है मै काव्य की ज्यादा समझ नहीं रखता लिहाजा आप मेरी बात समझेंगे /थैंक्स /

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© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.