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देखना एक इतिहास को बनते हुए

कविता के एक ब्लॉग पर इतिहास उतरते हुए देख कर अचम्भा मत कीजिये /आज ऐसा ही हुआ जब ग्वालियर के रूपसिंह स्टेदीयम  पर सचिन तेंदुलकर का बल्ला अपनी ऊंचाइयों के सारे मानदंड ध्वस्त कर नई मंजिलों को छूता  नजर आया .हजारों हजार रन और सैकड़ों शतकों के बाद भी सचिन ने आज दोहरे शतक का जो नायाब शीर्ष पाया वह सैकड़ों साल के एक दिवसीय क्रिकेट मे इस से पहले कोई नहीं छू सका है ,और मजा यह भी कि  ये सब ३७ साल कि उम्र मे ,कई कई नश्तर ,चोटें सहने ,झेलने और फिर उस से भी ज्यादा  मजबूत हो कर वापसी करने के जज्बे के सा थ /
सलाम करना ही होगा इस नौजवान को जो अभी भी अपने से आधी उम्र के लगभग खिलाडियों के साथ उन्ही की सी बल्कि उस से भी ज्यादा तेजी से चीते की तरह विकेट पर भागता है ,शेर की तरह गेंद पर झपट ता है ,गोते लगाता है ,मसलन उम्र को स्वीकाने की जगह उसे ललकारता है /जिस उम्र मे साथ के तमाम खिलाडी गेंद बल्ले को अलविदा कह कर   कोच  या कमेंटेटर हो गए  ,सचिन गेंद बाजों को अवकाश   दिलाने  में जुटे हैं /वक्त बीत गया दो दशकों का ,कितने आये गए पर भारत का ये लाल जितना पुराना होता जा रहा है उतना ही और कीमती ,खूबसूरत और तेज होता जा रहा है /
ग्वालियर का आज का मैच उनके बल्ले से निकली जलतरंग है ,ग़जल है ,गीत है और है शिव तांडव स्त्रोत जिसके आगे आने का दम इस अफ़्रीकी टीम के भीषण तेज गेंद बाजों में नहीं था /
आज किसी ने ठीक ही कहा की सचिन की इस पारी में सबसे अच्छा ये होगा कि  उनकी ही टीम मे शामिल हो लिया जाय,कमसे कम उन्हें गेंद बाजी तो नहीं करनी पड़ेगी /
हमार सचिन है ई जौन खेल रहा है और ससुरन के छक्का छोराय रहा है /सारे दुक्खों.महंगाई ,पीड़ा के बीच सचिन की हर उपलब्धि  पर पूरा हिन्दुस्तान फ़िदा है ,दुनिया फ़िदा है ,ये हीरा हमारा  है ,हमें जान सा प्यारा है /
खुदा ,इश्वर ,गौड,सभी उसकी रक्षा करें ,उसे ताकत दें ,हौसला दें जो उसके पास है कि वो यूं ही हमारा माथा उठाये रक्खे /
ऐसे रत्न की उपलब्धि पर आइये खुद को किस्मत वाला मान लें कि हमने सचिन को खेलते देखा है और जिन यादों का लालीपॉप हम उम्र भर चूसते रहेंगे /अपने इस नायाब शेर को बहुत बहुत बधाइयाँ ,प्यार ,शुभ कामनाएं /आमीन  

3 टिप्‍पणियां:

  1. जनाब ,
    एक कविता सचिन के शौर्य के नाम पर तो बनती ही है पर आपने तो दस्तूर ही बदल दिया खैर कोइ बात नहीं उम्मीद है अगली पोस्ट जरूर सचिन के नाम एक कविता होगी /
    बांकी समाचार यह है की कलकत्ते से कल ही लौट आया हूँ और आपके मेल के इन्तजार में हूँ /

    उत्तर देंहटाएं
  2. जनाब ,
    एक कविता सचिन के शौर्य के नाम पर तो बनती ही है पर आपने तो दस्तूर ही बदल दिया खैर कोइ बात नहीं उम्मीद है अगली पोस्ट जरूर सचिन के नाम एक कविता होगी /
    बांकी समाचार यह है की कलकत्ते से कल ही लौट आया हूँ और आपके मेल के इन्तजार में हूँ /

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