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गीत

महसूस होती है  किसी की कमी धीरे धीरे /
उतरती है आँखों में नमी धीरे धीरे /
कोई यादों की गहराई में ग़ुम है /
आई है याद जो थी थमी धीरे धीरे /
तनावों का अजीब नश्तर है /
कट रही बर्फ इक जमी धीरे धीरे /
मेरी आँखों में देखी क्या कहानी ?
उदासी से भरी इक ग़मी धीरे धीरे /
यूं दुनिया बहुत फानी है हमारी /
मुहब्बत पर इसी में रमी धीरे धीरे //

2 टिप्‍पणियां:

  1. एक और अच्छी ग़ज़ल.
    धीरे धीरे का बहुत अच्चा प्रयोग किया है.

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© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.