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प्यार किसने देखा है ?
वह वृत्त है या रेखा है ?
सरल है या गोला है ?
ठोस है या पोला है ?
कठिन है या भोला है ?
लेकिन दोस्त ये पैमाने तो प्यार के नहीं ,
इन पर भावना को तोलना सही तो नहीं ,
प्यार तो एक मखमली छुवन है ,अहसास है ,
जो मेरे ,तुम्हारे ,सभी के अंदर ,आसपास है ,
इन फर्जी मानकों पर क्यों बार बार तोलते हो ,
मजा तो ये है कीतुम ही प्यार पर
 अधिकार से बड़े बड़े मंचों पर बोलते हो
अजीज मेरे ,प्यार को इतना मत छोटा करो कि,
वो भावना से वस्तु बन जाये ,
जिस में हम सभी पड़े है ,वक़्त के उसी ,
कीचड में सन जाये ,
रागिनी को गीत बन कर चलने दो ,
प्यार को अंधेरों में एक दीप जैसा जलने दो ,

2 टिप्‍पणियां:

  1. रागिनी को गीत बन कर चलने दो ,
    प्यार को अंधेरों में एक दीप जैसा जलने दो
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

    उत्तर देंहटाएं

© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.