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ग़ज़ल

by 6:50 am
ग़ज़ल शब्द नहीं हैं,अर्थ नहीं हैं ,लय का है भारी टोटा / सच मे कहिये,क्या करियेगा ,जब अपना सिक्का खोटा// भूखे ,नंगे,मजलूमों ने तो अपना क...Read More
by 12:52 pm
गीत  मेरी चीख सुनेगा कौन? मैं तो बादल सा आवारा , गाँव शहर की गलियों गलियों , फिरता हूँ पागल ,नाकारा , मुझको लेकर उम्मीदों के सुं...Read More
by 10:31 pm
ग़ज़ल  टूटे मन से और बहुत भी टूटा हूँ/ औरों को क्या कहूं जो खुद ही झूठा हूँ// जग में कितने अपनों को दी पीडाएं / औरों से ठोकर खाई तो रू...Read More

ग़ज़ल

by 10:45 pm
हवाओं  के  उलटे ही हम बोलते हैं / उडने के पहले ही पर तौलते हैं// रही जंगलों में है रहने की आदत/ मगर  मन में इसको ही घर बोलते हैं// अंधे...Read More

आप

by 4:12 pm
आप फिर याद आने लगे हैं/ जख्म फिर मुस्कुराने लगें हैं // धुप की बढ़ रही है तपिश / फूल फिर गुनगुनाने लगें हैं // उम्र ज्यों होगई आइना / अक्स ख...Read More

मन

by 5:47 pm
मन खो गया है यह तन  खो गया है , तुमको दिया हर वचन खो गया है //      उदासी की शामों में खोई हैं रातें , ज़माने की सरगोशियों  की हैं बातें , ज...Read More
by 9:17 pm
अन्ना जी के लिए ............ जब जुल्म की ताकत टूटेगी ,जब ताज धरा पर आएगा , जब सच का सूरज चमकेगा ,जब हर जर्रा मुस्काएगा , जब कोटि-कोटि जन स...Read More

ग़ज़ल

by 8:49 am
मैं आदमी हूँ ,मुझे आदमी ही रहने दो/ रोज के रंज ओ ग़म लाचारगी से सहने दो // दोस्त के तेग से बच पाया है कोई सीजर? मुझे अनजान सड़क पर नदी सा बह...Read More

चाँद

by 11:49 pm
आज फिर नभ में खिला है एक पूरा चाँद , पर तुम्हारे बिन लगा मुझको अधूरा चाँद, बादलों के बीच करता है चहलकदमी , नापता है जिंदगी की ढेर सी दूरी , ...Read More

ग़ज़ल

by 11:52 am
इतना मायूस न हो ए मेरे दिले नादाँ , इन अंधेरों में उजालों को गुनगुनाया कर , मुश्किलें लाख सही ,दर्द सही ,चोट सही , टूटते दिल के साथ फिर भी म...Read More
© डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह. Blogger द्वारा संचालित.